इतिहास के वे गुमनाम नायक जिन्होंने स्वतंत्रता की नींव रखी
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे अनगिनत योद्धा थे जिन्होंने फांसी के फंदे को हंसते-हंसते चूमा, परंतु इतिहास के पन्नों में उन्हें उचित स्थान नहीं मिला।
इतिहास, समाज, साहित्य, समसामयिक राजनीति और जीवन मूल्यों पर गंभीर व बेबाक वैचारिक स्तंभ।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे अनगिनत योद्धा थे जिन्होंने फांसी के फंदे को हंसते-हंसते चूमा, परंतु इतिहास के पन्नों में उन्हें उचित स्थान नहीं मिला।
कबीरदास जी के दोहे सदियों पूर्व जितने प्रासंगिक थे, आज धार्मिक और सामाजिक संकीर्णताओं के बीच उससे कहीं अधिक मार्गदर्शक हैं।
इस आलेख में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता "राम की शक्ति पूजा" से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।
इस आलेख में दफ्तर की मीटिंग्स और अंतहीन पीपीटी का आतंक से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।
क्लिक्स पाने की होड़ में मुख्यधारा की पत्रकारिता कैसे गंभीर विश्लेषण से दूर होकर सतही तमाशे में बदलती जा रही है?
"वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल दूर सवेरे, वह प्रदीप जो बुझ जाने को है जीवन के घेरे..." दिनकर के ओजस्वी स्वर की गूंज।
बारिश के मौसम में बांद्रा से अंधेरी जाना किसी एवरेस्ट चढ़ाई से कम नहीं होता, और ऑटो वाले भैया का मीटर तो जैसे गति का नया नियम लिखता है!
क्रिकेट से लेकर भू-राजनीति और क्वांटम फिजिक्स तक—हमारे फेसबुक और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के विद्वान कभी चूकते नहीं।