श्रेणी विमर्श

साहित्य

कविता, गद्य, लेख संग्रह और साहित्यिक दृष्टिकोण।

कबीर की साखियां और 21वीं सदी के सामाजिक पाखंड
21 Oct, 2026 4 मि. पठन

कबीर की साखियां और 21वीं सदी के सामाजिक पाखंड

कबीरदास जी के दोहे सदियों पूर्व जितने प्रासंगिक थे, आज धार्मिक और सामाजिक संकीर्णताओं के बीच उससे कहीं अधिक मार्गदर्शक हैं।

Dr. Dheeraj Fulmati Singh
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मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानियां और आज का ग्रामीण भारत
18 Oct, 2026 4 मि. पठन

मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानियां और आज का ग्रामीण भारत

गोदान और कफ़न जैसी कृतियां आज भी हमें यह सोचने पर विवश करती हैं कि क्या किसानों और वंचितों की स्थिति में बुनियादी परिवर्तन आया है?

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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता "राम की शक्ति पूजा"
13 Oct, 2026 5 मि. पठन

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता "राम की शक्ति पूजा"

इस आलेख में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता "राम की शक्ति पूजा" से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। यह बिंदास धीरज मंच का एक गंभीर एवं विचारोत्तेजक विश्लेषण है।

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रामधारी सिंह दिनकर की "रश्मिरथी" और कर्ण का जीवन दर्शन
28 Sep, 2026 5 मि. पठन

रामधारी सिंह दिनकर की "रश्मिरथी" और कर्ण का जीवन दर्शन

"वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल दूर सवेरे, वह प्रदीप जो बुझ जाने को है जीवन के घेरे..." दिनकर के ओजस्वी स्वर की गूंज।

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